Thursday, March 12, 2026

शुभ प्रभात मित्रों

 ॐ श्रीविष्णवे च विद्मिहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो: विष्णुः प्रचोदयात।

ॐ त्रैलोक्यमोहनाय विद्मिहे आत्मारामाय धीमहि तन्नो: विष्णुः प्रचोदयात।।


सम्पूर्ण सृष्टि के पालक,योगियों के ध्यान में रमणीय और समस्त लोकों के एकमात्र स्वामी श्रीहरि के चरणों में कोटिशः नमन । 

श्री हरि सभी का कल्याण करें।ॐ_नमो_भगवते_वासुदेवाय_नमः



Sunday, March 8, 2026

शिक्षा सिर्फ जीविका का स्रोत नहीं,बल्कि समाज मे सम्मान दिलाने का जरिया भी है।

कक्षा में खड़े होकर पढ़ाना सिर्फ नौकरी नहीं होती यह एक जिम्मेदारी होती है। जब एक शिक्षक ब्लैकबोर्ड के सामने खड़ा होता है तो सामने सिर्फ कॉपियाँ और बैग नहीं होते बल्कि सामने कई सपने बैठे होते हैं।
किसी के घर की उम्मीद, किसी गरीब माँ-बाप का सहारा और किसी बच्चे का वो सपना जो शायद पहली बार इसी कक्षा में आकार ले रहा होता है।
एक शिक्षक जब पढ़ाता है तो वह सिर्फ किताब का अध्याय नहीं समझाता बल्कि 
वह बच्चों को यह विश्वास भी दिलाता है कि “तुम कर सकते हो।”
कभी-कभी बच्चे शोर करते हैं, विषयवस्तु पर ध्यान नहीं देते गलतियाँ करते हैं।
लेकिन एक शिक्षक जानता है कि
आज जो बच्चा समझ नहीं पा रहा,
कल वही बच्चा सबसे आगे भी निकल सकता है।
शिक्षक का काम सिर्फ पढ़ाना नहीं है,
बल्कि हर बच्चे के अंदर छिपी हुई क्षमता को पहचानना भी है।
और सच कहें तो एक शिक्षक की असली कमाई उसका वेतन नहीं होता बल्कि असली कमाई वह दिन होता है
जब उसका पढ़ाया हुआ कोई पुराना छात्र आकर कहता है —
“सर, अगर आप उस दिन मुझे नहीं समझाते…
तो शायद मैं आज यहाँ नहीं होता।”
यही एक शिक्षक की सबसे बड़ी उपलब्धि है।