Sunday, October 30, 2011

और बात है...

हमारी हर अदा मे
छुपी तेरी मुहब्बत,
तूने महसूस ना किया

ये और बात है!
मैने हरदम तेरे ही

ख्वाब पलको पे सजाए
मुझे ताबीर ना मिली

ये और बात है!
मैने जब भी तुझसे

बात करनी चाही,
मुझे अल्फ़ाज़ ना मिले

ये और बात है!
मै तेरे इश्क के समंदर मे

दूर तक निकला,
मुझे साहिल ना मिला
ये और बात है!
कुदरत ने लिखा था

तुझे मेरी तक़दीर मे,
तेरी किस्मत मे

नही था ये और बात है!





Tuesday, October 25, 2011

शुभ-दीपावली


कल प्रकाश पर्व  दिवाली है,कार्तिक मास की अमावस्या | पौराणिक कथाओ  के अनुसार आज ही के 
दिन भगवान राम लंकाधिपति रावण पर विजयश्री प्राप्त कर अयोध्या लौटे थे| नगर वासियों ने  पूरी
अयोध्या को दीपकों से सजाकर जगमग कर अपनी खुशियों का इज़हार किया और अपने प्रभु 
श्रीराम का स्वागत किया |
कार्तिक की इसी अमावस्या को द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने बकासुर का बढ़ किया था|
आज ही के दिन जैन धर्म के नायक स्वामी महावीर का निर्वान दिवस है | पंद्रहवी शताब्दी में इसी 
दीपावली  के दिन सिक्ख गुरु नानकदेव की मृत्यु हुयी थी और आज ही के दिन आर्यसमाज
के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती ने अंतिम साँस ली थी|
इस प्रकार अमावस्या के अंधकार को यम का दूत समझा जाता था और उन्हीकी पूजाअर्चना के लिए
दीप जलाये जाते थे | आज यम को मृतु का देवता मानकर उनकी अचानक कल्पना कर ली गयी है
किन्तु   ऋग्वेद में वे जीवन और मांगल्य के प्रतीक थे|दीपावली का पर्व स्मृतियों का संसार लेकर 
आता है | आइए हम भी दीपदान करे और एक दुसरे के आत्म सम्मान और राष्ट्र के प्रति सच्ची निष्ठां 
रखते हुए यह संकल्प ले की हम अपने मन से ईर्ष्या द्वेष,कलुषता,स्वार्थ,लोभ,और अहंकार का अँधेरा 
मिटाकर  उन लोगो लिए दीप जलाएं  जिन्होंने देश की सुरक्षा में अपनी प्राणों की आहूतिया दे दी,और
जिन्होंने आतंकवाद का शिकार होकर अपने प्राण त्याग दिए  और उन लोगो को भी संबल देंने के लिए
जो हमें भ्रस्टाचार से मुक्त कराने की लडाई लड़ रहे हैं | और उन समस्त महा मानवों के लिए जो
इस संसार में प्रेम भाईचारा और बिश्वबंधुत्व के निर्माण के लिए चिंतन और साधना कर रहे है |
                                                                                             




















- अर्जुनराय,सकलडीहा,चंदौली उ०प्र०|  

Sunday, October 23, 2011

तेरे बगैर...

धरती-अम्बर जैसे
एक दूजे से दूर,
मिलने को मचल रहे है!
हम भी उनसे कुछ यूँ  
मिलने को मचल रहे है
यूँ तो राहें है बहुत,
पर  मंजिल नहीं है कोई
आलम ये है कि बहुत 
संभल के चल  रहे है !
शाम को जाकर
अक्स उनके देखा
जो  पन्नो के बीच
सुबह होने तक हम
उन्ही में सिमट  रहे है!
अंधेरी रातों में वो
आये मेरे पास कुछ यूँ
कि दिन के उजाले में
हम उनको ढूंढ रहे है !








Wednesday, October 19, 2011

काश...

काश  'जिन्दगी' को जी
लेना आसान होता !
हर खुशियों को यूहीं
पा लेना आसान होता !
चाह कर भी 'मौत' को  
चुन  पाना आसान होता !
रोते-रोते सच्ची हँसीं
दिलसे हँस पाना आसान होता !
सच्चा एक 'दोस्त' बिलकुल  
 तेरे जैसा पा लेना आसान होता !
यारो से बिछड़ के जाने पर भी
उदास  न  रह पाना आसान  होता !
'गम' ए दिल-दर्द  को हँस के
छुपा लेना आसान होता !
'अश्क' को आँखों से छलकने से पहले
आँखों में ही  रोक पाना आसान होता !
'खून के रिश्ते' जैसे कुछ  'रिश्ते'
तुमसे  बना लेना आसान होता !
आज की दुनिया में दुनिया की
'दुनियादारी' समझ लेना आसान होता !
काश! इस 'आसान' से 'शब्द'  को यूहीं
'आसान' समझ लेना 'आसान' होता !


  

Monday, October 17, 2011

'स्पंदन'


“शाम को आने से पहले सुबह को मना लो,
बिछड़ के जाने से पहले प्यार को बढ़ा लो,
हम भी बिछड़ेंगे कभी ,सबको ही बिछड़ना है,
दुनिया मे प्यार को आहों मे पलना है,
रात को आने से पहले शमा को जला लो,
प्यास को बढ़ने से पहले प्यास को बुझा लो,
आकर 'स्पंदन' पर 'अन्तस्तल' को संवार लो”!
 
 

Monday, October 10, 2011

'झुकी-झुकी सी नज़र'

















































'होठो से छु लो तुम','मेरी जिंदगी किसी और की', 'मेरे नाम का कोई और है', 'अपनी मर्ज़ी के कहाँ अपने 
सफ़र के हम है','पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा','वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी','तुम इतना जो 
मुस्कुरा रहे हो' के साथ-साथ 'होश वालो से न पूछो बेखुदी क्या चीज़ है' जैसे अमर गज़लों के बेताज बादशाह 
महान गज़लों के  गायक जगजीत  सिंह ने आज  बम्बई में निधन  हो गया|वे ७० वर्ष के थे और पिछले माह से ही बीमार चल रहे थे| उन्होंने अपने अलावा अपनी पत्नी चित्रासिंह के साथ दशको तक ग़ज़ल गायकी
और गैर फ़िल्मी गीतों के माध्यम से संगीत के शिखर पर छाये रहे | मानव ह्रदय की सम्वेदनावो को 
झिझोड़ने में महारत हासिल थी | 
इन्होने हिंदी के साथ साथ पंजाबी,उर्दू,सिन्धी,नेपाली,बंगाली,और गुजराती भाषाओ  में भी अपने गीत और 
ग़ज़ल गाये |उन्होंने अपनी सफल्तावो के रिकॉर्ड तोड़ते हुए ८० से भी ज्यादा अलबमो को रिलीज़ कराया और
वे भारत के पहले ऐसे आर्टिस्ट थे जिन्होंने अपनी पत्नी चित्रा सिंह के साथ संगीत के इतिहास में पहली 
बार डिज़िटल रिकार्डिंग कराई |इन्होने ग़ज़ल गायकी को विश्व में संगीत के शिखर पर  पहुचाया | भारत 
सरकार ने इन्हें २००३ मे  भारत के उच्चकोटि के पुरस्कारों में शुमार 'पद्मभूषण' से नवाज़ा  |
आज सम्पूर्ण विश्व के संगीत प्रेमियों  के साथ मै भी अपनी श्रद्धान्ज़ली उन्हें अर्पित करता हूँ और ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ की वे इनके अपनों को शक्ति और उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे |








         

Thursday, October 6, 2011

HAPPY DASHAHARA..

शहरा के शुभ अवसर पर आप सभी लोगो  ढेर सारी बधाई व शुभ-कामना !!